मुंगेर कच्ची कांवरिया पथ पर दिखा रिश्तों का अनोखा दास्तान। जहां मामा की लगी नौकरी तो पूरा परिवार दंडवत देते चले बाबाधाम। हर हर महादेव के जयकारे से गूंजा कांवरिया पथ।
कलयुग में रिश्तों का अनमोल मिसाल
दरअसल इस कलयुग में जहां रिश्तों की अहमियत खत्म होती जा रही है। तो वहीं मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर कुछ ऐसे नजारे दिखा। जिससे यह लगता है कि आज भी रिश्तों की मजबूती लोगों के बीच बरकरार है। जहां भांजा और भांजी के प्यारे रिश्तों की अनोखी दास्तान देखने को मिला।
ठीक उसी प्रकार मुंगेर के कच्ची कमरिया पथ पर कुछ ऐसे नजारे देखने को मिला जो यह साबित करता हैं कि आज भी कई परिवारों में रिश्तो की डोर बहुत ही मजबूत है यह अद्भुत दृश्य केवल आस्था का नहीं बल्कि समर्पण और प्रेम का भी प्रतीक बना है।
मामा की नौकरी भांजे- भांजी की मन्नत
मामा का BSF में नौकरी लगीं तो भांजा , भांजी , बहन और जीजा दंडवत देते बाबाधाम देवघर जा रहे है। जानकारी के अनुसार लखीसराय जिला के सूर्यगढ़ा निवासी मंगल सिंह अपनी पत्नी चांदनी कुमारी, बेटा राज कुमार और बेटी आरती कुमारी के साथ सुल्तानगंज से जलभर दंडवत देते हुए बाबा नगरिया देवघर जाते दिखे।
दंडवत यात्रा पर निकले 105 KM पूरे परिवार
पिता मंगल पांडे खुद बीते 12 वर्षों से हर साल देवघर जाते हैं लेकिन इस बार उनके बच्चों और पत्नी ने भी साथ चलकर या यात्रा विशेष बना दी। इनका कहना है कि जब मामा की नौकरी की खबर मिली तो पूरे परिवार ने तय किया कि अबकी बार यह यात्रा दंडवत होकर ही बाबा धाम जाएंगे।
जब उनलोगों से इस बारे में जानकारी लिए गई तो पता चला कि पिता तो 12 वर्षों से देवघर जाते रहे है। और इस बार मामा रोहित कुमार की नौकरी लगी है। जिस कारण से उनके दोनों भांजा और भांजी भी देवघर की और चल पड़े है। दरअसल अपने मामा के लिय उन लोगों ने मन्नत मांगी थी कि जब उनकी नौकरी लग जाएगी तो वे भी पापा के तरह दंडवत करते हुए देवघर जायेगें। सभी ने बताया कि वे इस तरह से जाने में उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही है।
रिश्तो में आस्था और बलिदान की नई परिभाषा इस यात्रा के माध्यम से यह परिवार सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं निभा रही बल्कि एक गहरी सामाजिक और भावनात्मक सिख भी दे रहा। कि जब अपने लिए नहीं अपनों के लिए किया गया प्रयास कहीं ज्यादा महान होता है मां की सफलता को परिवार ने भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया।
