मकर संक्रांति से पहले मुंगेर के बाजारों में तिलकुट की धूम। गया से आए कारीगर दिन-रात खस्ता, खौआ और गुड़-चीनी वाले तिलकुट कर रहे हैं तैयार, क्या हैं तिलकुट की खास जानें

Share With Friends or Family

मुंगेर के बाजारों में मकर संक्रांति की आहट के साथ ही तिलकुट की सौंधी खुशबू फैलने लगी है। चौक-चौराहों पर सजी दुकानों में गया से आए कारीगर दिन-रात तिलकुट बनाने में जुटे हैं। खस्ता तिलकुट से लेकर खौआ और गुड़-चीनी वाले तिलकुट तक हर स्वाद में मकर संक्रांति की मिठास घुल चुकी है।

मकर संक्रांति की दस्तक और तिलकुट की खुशबू

दरअसल जैसे-जैसे मकर संक्रांति नजदीक आ रही है, मुंगेर का बाजार भी त्योहार के रंग में रंगने लगा है। चौक-चौराहों पर सजी तिलकुट की दुकानों में गया से आए कारीगर बड़े पैमाने पर तिलकुट तैयार कर रहे हैं, ताकि ग्राहकों की मांग पूरी की जा सके। तिल और गुड़ की खुशबू से पूरा इलाका महक रहा है। कारीगर पारंपरिक तरीके से तिलकुट बनाने में जुटे हैं ।

हर स्वाद के लिए तिलकुट

कहीं खस्ता तिलकुट बन रहा है तो कहीं खौआ मिलाकर मीठा तिलकुट तो कहीं चीनी वाला तिलकुट लोगों की पसंद बन रहा है। लोग अभी से ही तिलकुट की खरीदारी कर रहे हैं, ताकि मकर संक्रांति पर अपने प्रियजनों के घर इसे संदेश और सौगात के रूप में भेज सकें। दुकानदारों के मुताबिक इस बार तिलकुट की कीमत 280 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति किलो तक है, लेकिन इस बार महंगाई होने के कारण जो बिक्री होना था उस तरह का बिक्री नहीं है । खस्ता, खौआ और गुड़-चीनी वाला तिलकुट सबसे ज्यादा बिक रहा है। दाम थोड़ा बढ़ा है, लेकिन लोग परंपरा निभाने के लिए जरूर खरीद रहे हैं।

गया से आए कारीगरों का उद्देश्य

कारीगरों का कहना है कि मकर संक्रांति उनके लिए सबसे व्यस्त समय होता है। दिन-रात मेहनत कर वे सैकड़ों किलो तिलकुट तैयार करते हैं, ताकि हर घर तक त्योहार की मिठास पहुंच सके। हम गया से हर साल यहां आते हैं। मकर संक्रांति के समय तिलकुट की बहुत मांग रहती है। लोगों को शुद्ध और ताजा तिलकुट देना ही हमारा मकसद है।

Share With Friends or Family

Leave a Comment