मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड के रामानंद पारसी राम प्लस टू उच्च विद्यालय, जलालाबाद के छात्र प्रियांशु राज ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा में जबरदस्त सफलता हासिल की है। उन्होंने 488 अंक प्राप्त कर 97.60 प्रतिशत के साथ बिहार में सेकंड टॉपर का स्थान प्राप्त किया। प्रियांशु की इस सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले में हर्षोल्लास का माहौल है।
सफलता की कहानी: मेहनत और आत्मविश्वास से मिली सफलता
प्रियांशु की सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि उनकी कठिन परिश्रम और लगन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि वे स्कूल के नियमित अध्ययन के अलावा ट्यूशन और सेल्फ स्टडी पर विशेष ध्यान देते थे। उनका मानना है कि आत्म-अनुशासन और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
परिवार का सहयोग: माता-पिता ने दी सही दिशा
प्रियांशु के पिता राजीव कुमार और माता रीता देवी दोनों ही असरगंज के सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया और सही मार्गदर्शन दिया। उनके दादा शंकर दास, जो एक किसान हैं, ने भी हमेशा अपने पोते का समर्थन किया। उनके छोटे भाई अभिजीत राज, जो अभी 7वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, को भी अपने बड़े भाई की इस सफलता से प्रेरणा मिली है।
पूरे जिले में हर्ष का माहौल: बधाइयों का लगा तांता
जैसे ही यह खबर फैली कि प्रियांशु बिहार में सेकंड टॉपर बने हैं, उनके घर और स्कूल में बधाइयों का तांता लग गया। शिक्षक, मित्र, रिश्तेदार और गांव के लोग सभी उन्हें शुभकामनाएँ देने पहुंचे। स्कूल प्रशासन ने भी उनकी इस सफलता पर गर्व जताया और स्कूल के अन्य विद्यार्थियों के लिए उन्हें एक प्रेरणास्रोत बताया।
लक्ष्य: प्रियांशु का सपना है IAS बनना
प्रियांशु ने अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया कि उनका सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना है। वे यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर एक सफल अधिकारी बनना चाहते हैं। उनके अनुसार, कड़ी मेहनत, लगन और सही दिशा में किया गया प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
पढ़ाई में अनुशासन और मोबाइल से दूरी
प्रियांशु की मां रीता देवी ने बताया कि उनका बेटा सोशल मीडिया से काफी दूर रहता था और मोबाइल फोन का उपयोग केवल पढ़ाई के लिए करता था। उन्होंने अन्य छात्रों को भी यही सलाह दी कि वे मोबाइल और सोशल मीडिया से बचें और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें।
परिवार की प्रतिक्रिया: गर्व और खुशी का माहौल
प्रियांशु के पिता राजीव कुमार ने कहा, “हमारे परिवार में कई इंजीनियर हैं, लेकिन प्रियांशु ने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया है। हमें उस पर गर्व है।” वहीं, उनकी मां ने कहा, “हमें यकीन नहीं हो रहा कि हमारे बेटे ने इतना बड़ा नाम कमा लिया है। यह हमारे लिए गर्व का क्षण है।” उनके दादा शंकर दास ने कहा, “हम किसान परिवार से हैं। मेरा बेटा और बहू शिक्षक बने, और अब मेरा पोता भी बड़ा अधिकारी बनना चाहता है। हमें उस पर बहुत गर्व है।”
निष्कर्ष: मेहनत और लगन से ही मिलती है सफलता
प्रियांशु राज की सफलता यह दर्शाती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में कोई कमी न हो, तो किसी भी ऊँचाई को हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है और यह दिखाती है कि सच्ची लगन और कड़ी मेहनत से हर सपना साकार किया जा सकता है।